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सोमवार, 31 अगस्त

दया करके मेरे आँसुओं को अपनी मशक में भर ले।—भज. 56:8.

दाविद की ज़िंदगी में बहुत-सी मुश्‍किलें आयीं और उसने कई बार आँसू बहाए। कई लोग उससे नफरत करते थे और उसके परिवारवालों और दोस्तों ने भी उसे धोखा दिया। (1 शमू. 19:10, 11; 2 शमू. 15:10-14, 30) एक बार दाविद इतना दुखी था कि उसने लिखा, “आहें भरते-भरते मैं पस्त हो चुका हूँ। मैं पूरी रात अपना बिस्तर आँसुओं से भिगोता हूँ, आँसुओं के सैलाब में मेरा दीवान डूब जाता है।” (भज. 6:6) दाविद की ज़िंदगी में कई मुश्‍किलें तो आयीं, पर उसे यकीन था कि यहोवा उससे प्यार करता है और वह उसके साथ है। उसने लिखा, “यहोवा मेरा बिलखना ज़रूर सुनेगा।” (भज. 6:8) आज के वचन से पता चलता है कि यहोवा हमसे कितना प्यार करता है और उसे हमारी कितनी परवाह है। उसने कहा कि यहोवा मानो उसके आँसुओं को एक बोतल में भर रहा है और उसके पास एक किताब में उसके एक-एक आँसू का हिसाब लिखा है। दाविद को पूरा भरोसा था कि यहोवा उस पर ध्यान दे रहा है और जानता है कि वह किस मुश्‍किल से गुज़र रहा है। यही नहीं, यहोवा को यह भी पता है कि इस सबकी वजह से उस पर क्या बीत रही है। प्र24.12 पेज 22 पै 11-12

रोज़ाना बाइबल वचनों पर ध्यान दीजिए—2026

मंगलवार, 1 सितंबर

खुद को जाँचते रहो कि तुम विश्‍वास में हो या नहीं।—2 कुरिं. 13:5.

यह सच है कि प्रौढ़ बनने के लिए हमें मेहनत करनी है, लेकिन इसके बाद भी हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम आगे भी प्रौढ़ बने रहें। हमें कभी ऐसा नहीं सोचना चाहिए, ‘मेरा तो यहोवा के साथ मज़बूत रिश्‍ता है, मुझे और मेहनत करने की ज़रूरत नहीं।’ (1 कुरिं. 10:12) इसके बजाय हमें लगातार ‘खुद की जाँच’ करनी है और यहोवा के साथ अपना रिश्‍ता मज़बूत करते जाना है। प्रेषित पौलुस ने कुलुस्से के मसीहियों को जो चिट्ठी लिखी, उसमें एक बार फिर उसने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें प्रौढ़ बने रहना है। वैसे तो वहाँ के भाई-बहन प्रौढ़ थे, फिर भी पौलुस ने उन्हें खबरदार किया कि वे दुनिया की सोच ना अपना लें। (कुलु. 2:6-10) उसने अपनी चिट्ठी में इपफ्रास का भी ज़िक्र किया जो शायद कुलुस्से के भाई-बहनों को अच्छी तरह जानता था। उसने लिखा कि इपफ्रास उनके लिए लगातार प्रार्थना कर रहा था कि वे ‘मज़बूत खड़े रहें’ यानी प्रौढ़ बने रहें। (कुलु. 4:12) पौलुस और इपफ्रास से हम क्या सीखते हैं? यही कि अगर हम प्रौढ़ बने रहना चाहते हैं, तो हमें परमेश्‍वर से मदद लेनी होगी, लेकिन साथ ही हमें खुद भी मेहनत करनी होगी। पौलुस और इपफ्रास भी यह बात जानते थे, तभी वे चाहते थे कि कुलुस्से के भाई-बहन मुश्‍किलों के बावजूद प्रौढ़ बने रहने के लिए मेहनत करते रहें। प्र24.04 पेज 6 पै 16-17

रोज़ाना बाइबल वचनों पर ध्यान दीजिए—2026

बुधवार, 2 सितंबर

हमारे साथ यहोवा है। इसलिए तुम उनसे मत डरना।—गिन. 14:9.

यहोवा का डर मानने का मतलब है, हमें उससे इतना प्यार है कि हम ऐसा कोई काम नहीं करते जिससे उसे दुख पहुँचे। हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि यहोवा की नज़र में क्या सही है और क्या गलत, क्या सच है और क्या झूठ। और फिर वही करते हैं जिससे वह खुश हो। (नीति. 2:3-6; इब्रा. 5:14) अगर हम यहोवा से ज़्यादा इंसानों से डरने लगें, तो हम सच्चाई की राह से दूर जा सकते हैं। ध्यान दीजिए कि इसराएल के उन 12 प्रधानों के साथ क्या हुआ जो वादा किए गए देश की जासूसी करने गए थे। उनमें से दस जासूस कनानियों से इतना डर गए कि यहोवा के लिए उनका प्यार कम हो गया। उन्होंने बाकी इसराएलियों से कहा, “हम वहाँ के लोगों से नहीं लड़ सकते। वे हमसे कहीं ज़्यादा ताकतवर हैं।” (गिन. 13:27-31) यह तो सच था कि कनानी ज़्यादा ताकतवर थे। लेकिन यह बात सच नहीं थी कि इसराएली उन्हें हरा नहीं सकते थे। दस जासूस यह भूल गए कि यहोवा इसराएलियों के साथ है। प्र24.07 पेज 9 पै 5-6

रोज़ाना बाइबल वचनों पर ध्यान दीजिए—2026
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