शुक्रवार, 28 अगस्त
तू अपनी मुट्ठी खोलकर हरेक जीव की इच्छा पूरी करता है।—भज. 145:16.
यहोवा की तरह हम भी दूसरों से प्यार करते हैं, इसलिए हम उनकी मदद करते हैं। क्या आप किसी ऐसे भाई या बहन को जानते हैं जिसे खाने-पीने की चीज़ों या कपड़ों की ज़रूरत है? यहोवा आपके ज़रिए उनकी ज़रूरतें पूरी कर सकता है। जब कोई प्राकृतिक विपत्ति आती है, तब यहोवा के लोग और भी बढ़-चढ़कर दूसरों की मदद करते हैं। जैसे जब कोविड-19 महामारी चल रही थी, तो भाई-बहनों ने ज़रूरतमंद लोगों को खाना, कपड़े और दूसरी चीज़ें दीं। कई भाई-बहनों ने दुनिया-भर में होनेवाले काम के लिए दिल खोलकर दान दिया। इससे अलग-अलग जगहों पर राहत काम किया गया। दान देनेवाले उन भाई-बहनों ने इब्रानियों की किताब में लिखी बात मानी, “भलाई करना और जो तुम्हारे पास है उसे दूसरों में बाँटना मत भूलो क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से बहुत खुश होता है।”—इब्रा. 13:16. प्र24.09 पेज 27 पै 6-7
शनिवार, 29 अगस्त
‘पहचानो कि ज़्यादा अहमियत रखनेवाली बातें क्या हैं।’—फिलि. 1:10.
मान लीजिए, आप अपना घर चलाने के लिए कोई नौकरी ढूँढ़ रहे हैं। आपको दो नौकरियाँ मिल रही हैं। अब आपको फैसला करना है कि आप कौन-सी नौकरी लेंगे। आप सारी जानकारी इकट्ठा करते हैं, यह पता लगाते हैं कि दोनों नौकरियों में आपको क्या काम करना होगा, कितने घंटे काम करना होगा, आने-जाने में कितना वक्त लगेगा वगैरह। दोनों ही नौकरियाँ बाइबल के सिद्धांतों के हिसाब से सही हैं। हो सकता है, आपको एक नौकरी ज़्यादा अच्छी लग रही हो क्योंकि वह काम आपको पसंद है या फिर उसमें ज़्यादा तनख्वाह मिलेगी। लेकिन कोई फैसला करने से पहले आपको कुछ और बातों के बारे में भी सोचना चाहिए। जैसे दोनों ही नौकरियों के बारे में सोचिए: अगर मैं यह नौकरी करूँगा, तो कहीं सभाओं में जाना मेरे लिए मुश्किल तो नहीं हो जाएगा? क्या मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिता पाऊँगा, उन पर ध्यान दे पाऊँगा? क्या यहोवा के करीब आने में उनकी मदद कर पाऊँगा? इस तरह के सवालों के बारे में सोचने से आप पैसों से ज़्यादा अपने परिवार और यहोवा के साथ अपने रिश्ते पर ध्यान दे पाएँगे, जो “ज़्यादा अहमियत रखनेवाली बातें” हैं। तब आप एक ऐसा फैसला ले पाएँगे जिससे यहोवा खुश होगा और आपको आशीष देगा। प्र25.01 पेज 17-18 पै 11-13
रविवार, 30 अगस्त
यहोवा टूटे मनवालों के करीब रहता है।—भज. 34:18.
चाहे दूसरों ने आपके साथ बुरा व्यवहार किया हो, पर आप यकीन रख सकते हैं कि यहोवा आपसे प्यार करता है और आप उसकी नज़र में बहुत अनमोल हैं। अगर आप “कुचला हुआ” महसूस कर रहे हैं, तो याद रखिए कि यहोवा ने आपमें कुछ अच्छा देखा है, इसलिए उसने आपको अपनी तरफ खींचा है। (यूह. 6:44) वह आपसे बेइंतिहा प्यार करता है और आपकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार है। यीशु ने जिस तरह लोगों के साथ व्यवहार किया, उससे हम समझ सकते हैं कि यहोवा हमें कितना अनमोल समझता है। जब यीशु धरती पर था, तो कुछ लोगों को नीची नज़रों से देखा जाता था और लोग उन्हें बुरा-भला कहते थे। लेकिन यीशु उनके साथ प्यार से पेश आया और उसने उन पर दया की। (मत्ती 9:9-12) जैसे एक बार एक औरत जिसे एक बड़ी बीमारी थी, यीशु के पास आयी। वह ठीक होना चाहती थी, इसलिए उसने यीशु के कपड़े को छुआ और उसकी बीमारी दूर हो गयी। तब यीशु ने उसे डाँटा नहीं, बल्कि उसे दिलासा दिया और उसके विश्वास के लिए उसकी तारीफ की। (मर. 5:25-34) यीशु बिलकुल अपने पिता यहोवा की तरह है। (यूह. 14:9) इसलिए उसके बारे में पढ़कर हम समझ सकते हैं कि यहोवा हमारे बारे में कैसा महसूस करता है। हम यकीन रख सकते हैं कि यहोवा की नज़र में हम बहुत अनमोल हैं और वह हमारे अंदर अच्छाइयाँ देखता है। वह देखता है कि हमारा विश्वास कितना मज़बूत है और हम उससे कितना प्यार करते हैं। प्र24.10 पेज 7 पै 4-5