शनिवार, 5 सितंबर
प्रभु, तेरा नाम लेने से दुष्ट स्वर्गदूत भी हमारे अधीन हो रहे हैं।—लूका 10:17.
अगर आप प्रचार के लिए अच्छे-से तैयारी करेंगे, तो आप लोगों से आराम से बात कर पाएँगे और घबराएँगे नहीं। यीशु ने भी अपने चेलों को प्रचार में भेजने से पहले कुछ बातें बतायी थीं। उसने उन्हें सिखाया था कि उन्हें क्या कहना है और क्या करना है। (लूका 10:1-11) और जब चेलों ने ये बातें मानीं, तो उन्हें अच्छे नतीजे मिले और बहुत खुशी हुई। हम भी प्रचार के लिए अच्छे-से तैयारी कर सकते हैं। हम पहले से सोच सकते हैं कि हम लोगों से किस बारे में बात करेंगे और उन्हें कैसे अपनी बात समझाएँगे। हम इस बारे में भी सोच सकते हैं कि हमारी बात सुनकर लोग क्या-क्या कह सकते हैं और हम उन्हें क्या जवाब देंगे। यह सब तैयारी करने के बाद जब आप प्रचार में जाते हैं, तो घबराइए मत। मुस्कुराइए और आराम से बात कीजिए। प्र24.04 पेज 15-16 पै 6-7
रविवार, 6 सितंबर
हे यहोवा, हमारे परमेश्वर, तू महिमा, आदर और शक्ति पाने के योग्य है क्योंकि तू ही ने सारी चीज़ें रची हैं।—प्रका. 4:11.
खुशखबरी सुनाने की सबसे बड़ी वजह है कि हमें यहोवा परमेश्वर से और उसके पवित्र नाम से बेइंतिहा प्यार है। प्रचार करके हम दिखाते हैं कि हम अपने परमेश्वर से बहुत प्यार करते हैं और उसकी तारीफ करना चाहते हैं। हम मानते हैं कि यहोवा अपने सेवकों से महिमा, आदर और शक्ति पाने के योग्य है। जब हम लोगों को इस बात के सबूत देते हैं कि परमेश्वर ने “सारी चीज़ें रची हैं” और हम उसी की वजह से वजूद में हैं, तो हम यहोवा को “आदर” और “महिमा” दे रहे होते हैं। और जब हम अपना समय, ताकत और पैसा प्रचार काम में लगाते हैं और हमसे जितना हो सकता है उतना प्रचार करते हैं, तो हम उसके लिए अपनी “शक्ति” या ताकत लगा रहे होते हैं। (मत्ती 6:33; लूका 13:24; कुलु. 3:23) सीधे-सीधे कहें, तो हम अपने परमेश्वर से प्यार करते हैं और उसके बारे में दूसरों को बताना हमें बहुत अच्छा लगता है। हम लोगों को यह भी बताते हैं कि परमेश्वर का नाम क्या है और वह कैसा परमेश्वर है। प्र24.05 पेज 17 पै 11
सोमवार, 7 सितंबर
वह उन लोगों को इनाम देता है जो पूरी लगन से उसकी खोज करते हैं।—इब्रा. 11:6.
यहोवा आज हमें शांति और सुकून देता है और आनेवाले समय में हमें हमेशा की ज़िंदगी देगा। हम पूरा यकीन रख सकते हैं कि यहोवा हमें इनाम देना चाहता है और उसके पास ऐसा करने की ताकत भी है। इस यकीन की वजह से हम उसकी सेवा में लगे रहते हैं, ठीक जैसे पुराने समय में कई वफादार लोग उसकी सेवा में लगे हुए थे। तीमुथियुस उनमें से एक था। (इब्रा. 6:10-12) तीमुथियुस को पूरा यकीन था कि यहोवा जीवित परमेश्वर है और वह उसे इनाम देगा। (1 तीमु. 4:10) इसलिए उसने तन-मन से उसकी सेवा की और बढ़-चढ़कर भाई-बहनों की मदद की। उसने क्या-क्या किया? उसने पौलुस की सलाह मानी और एक अच्छा शिक्षक बनने के लिए खूब मेहनत की ताकि प्रचार करते वक्त और मंडली में वह अच्छी तरह सिखा सके। उसने मंडली के छोटे-बड़े सब लोगों के लिए एक अच्छी मिसाल रखी। यही नहीं, उसे कुछ मुश्किल ज़िम्मेदारियाँ भी मिली थीं, जैसे उसे गलती करनेवालों को प्यार से सुधारना था। यह काम भी उसने ज़रूर अच्छी तरह किया होगा। (1 तीमु. 4:11-16; 2 तीमु. 4:1-5) तीमुथियुस को यकीन था कि यहोवा उसे ज़रूर इनाम देगा।—रोमि. 2:6, 7. प्र24.06 पेज 22-23 पै 10-11