मंगलवार, 1 सितंबर
खुद को जाँचते रहो कि तुम विश्वास में हो या नहीं।—2 कुरिं. 13:5.
यह सच है कि प्रौढ़ बनने के लिए हमें मेहनत करनी है, लेकिन इसके बाद भी हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम आगे भी प्रौढ़ बने रहें। हमें कभी ऐसा नहीं सोचना चाहिए, ‘मेरा तो यहोवा के साथ मज़बूत रिश्ता है, मुझे और मेहनत करने की ज़रूरत नहीं।’ (1 कुरिं. 10:12) इसके बजाय हमें लगातार ‘खुद की जाँच’ करनी है और यहोवा के साथ अपना रिश्ता मज़बूत करते जाना है। प्रेषित पौलुस ने कुलुस्से के मसीहियों को जो चिट्ठी लिखी, उसमें एक बार फिर उसने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें प्रौढ़ बने रहना है। वैसे तो वहाँ के भाई-बहन प्रौढ़ थे, फिर भी पौलुस ने उन्हें खबरदार किया कि वे दुनिया की सोच ना अपना लें। (कुलु. 2:6-10) उसने अपनी चिट्ठी में इपफ्रास का भी ज़िक्र किया जो शायद कुलुस्से के भाई-बहनों को अच्छी तरह जानता था। उसने लिखा कि इपफ्रास उनके लिए लगातार प्रार्थना कर रहा था कि वे ‘मज़बूत खड़े रहें’ यानी प्रौढ़ बने रहें। (कुलु. 4:12) पौलुस और इपफ्रास से हम क्या सीखते हैं? यही कि अगर हम प्रौढ़ बने रहना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर से मदद लेनी होगी, लेकिन साथ ही हमें खुद भी मेहनत करनी होगी। पौलुस और इपफ्रास भी यह बात जानते थे, तभी वे चाहते थे कि कुलुस्से के भाई-बहन मुश्किलों के बावजूद प्रौढ़ बने रहने के लिए मेहनत करते रहें। प्र24.04 पेज 6 पै 16-17
बुधवार, 2 सितंबर
हमारे साथ यहोवा है। इसलिए तुम उनसे मत डरना।—गिन. 14:9.
यहोवा का डर मानने का मतलब है, हमें उससे इतना प्यार है कि हम ऐसा कोई काम नहीं करते जिससे उसे दुख पहुँचे। हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि यहोवा की नज़र में क्या सही है और क्या गलत, क्या सच है और क्या झूठ। और फिर वही करते हैं जिससे वह खुश हो। (नीति. 2:3-6; इब्रा. 5:14) अगर हम यहोवा से ज़्यादा इंसानों से डरने लगें, तो हम सच्चाई की राह से दूर जा सकते हैं। ध्यान दीजिए कि इसराएल के उन 12 प्रधानों के साथ क्या हुआ जो वादा किए गए देश की जासूसी करने गए थे। उनमें से दस जासूस कनानियों से इतना डर गए कि यहोवा के लिए उनका प्यार कम हो गया। उन्होंने बाकी इसराएलियों से कहा, “हम वहाँ के लोगों से नहीं लड़ सकते। वे हमसे कहीं ज़्यादा ताकतवर हैं।” (गिन. 13:27-31) यह तो सच था कि कनानी ज़्यादा ताकतवर थे। लेकिन यह बात सच नहीं थी कि इसराएली उन्हें हरा नहीं सकते थे। दस जासूस यह भूल गए कि यहोवा इसराएलियों के साथ है। प्र24.07 पेज 9 पै 5-6
गुरुवार, 3 सितंबर
क्या सारी दुनिया का न्याय करनेवाला कभी अन्याय कर सकता है?—उत्प. 18:25.
हम यकीन रख सकते हैं कि यहोवा जब भी लोगों का न्याय करता है, तो वह हमेशा सही होता है। अब्राहम भी यह बात अच्छे-से जानता था। उसे पता था कि “सारी दुनिया का न्याय करनेवाला” परमेश्वर यहोवा बहुत दयालु है, वह सबकुछ जानता है और हमेशा वही करता है जो सही होता है। यहोवा ने अपने बेटे को भी न्याय करना सिखाया है और न्याय करने की सारी ज़िम्मेदारी उसे सौंप दी है। (यूह. 5:22) वे दोनों इंसानों का दिल पढ़ सकते हैं और जान सकते हैं कि हर इंसान अंदर से कैसा है। (मत्ती 9:4) इसलिए वे ‘कभी अन्याय नहीं करेंगे,’ हमेशा वही करेंगे जो सही होगा। आइए हम भरोसा रखें कि यहोवा सबकुछ जानता है। और यह याद रखें कि हम कभी-भी दूसरों का न्याय नहीं कर सकते, सिर्फ यहोवा ही लोगों का न्याय कर सकता है। (यशा. 55:8, 9) हम यकीन रख सकते हैं कि यहोवा और यीशु एकदम सही न्याय करेंगे। हमारा राजा यीशु बिलकुल अपने पिता की तरह है। वह एकदम सही न्याय करेगा और दया भी करेगा।—यशा. 11:3, 4. प्र24.05 पेज 7 पै 18-19