शनिवार, 24 अक्टूबर
तुम्हें अपने काम का इनाम मिलेगा।—2 इति. 15:7.
माता-पिताओ, अपने बच्चे से कहिए कि वह दूसरों को बाइबल की सच्चाइयाँ बताने के मौके ढूँढ़ता रहे। (रोमि. 10:10) अपने विश्वास के बारे में दूसरों को बताना, एक साज़ बजाने जैसा है। अगर कोई साज़ बजाना सीख रहा है, तो शुरू-शुरू में वह कोई आसान-सी धुन बजाता है। धीरे-धीरे जब उसका हुनर बढ़ता है, तो वह और भी धुनें बजाने लगता है। उसी तरह जब कोई नौजवान दूसरों को अपने विश्वास के बारे में बताता है, तो शायद शुरू-शुरू में वह बस कुछ आसान-सी बातें बताए। जैसे वह स्कूल के किसी बच्चे से पूछ सकता है, “क्या तुम्हें पता है, इंजीनियर अकसर प्रकृति की चीज़ों को देखकर डिज़ाइन बनाते हैं? चलो मैं तुम्हें एक बढ़िया वीडियो दिखाता हूँ।” फिर क्या इसे रचा गया था? शृंखला का एक वीडियो दिखाकर, वह उससे पूछ सकता है, “प्रकृति की चीज़ों की बनावट देखकर जब कोई वैज्ञानिक एक नयी चीज़ बनाता है, तो सब उसकी तारीफ करते हैं। तो फिर प्रकृति की चीज़ों के लिए किसकी तारीफ की जानी चाहिए?” शायद इस छोटी-सी बातचीत से उस बच्चे को और जानने का मन करे। प्र24.12 पेज 19 पै 17-18
रविवार, 25 अक्टूबर
एक आदमी से पाप दुनिया में आया और पाप से मौत आयी।—रोमि. 5:12.
हमें पाप और मौत से छुड़ाने के लिए यहोवा ने फिरौती का इंतज़ाम किया और यीशु को धरती पर भेजा। लेकिन एक परिपूर्ण इंसान के बलिदान से लाखों-करोड़ों लोगों को ज़िंदगी कैसे मिल सकती है? प्रेषित पौलुस ने बताया, “जैसे एक आदमी [आदम] के आज्ञा तोड़ने से बहुत लोग पापी ठहरे, उसी तरह एक आदमी [यीशु] के आज्ञा मानने से बहुत लोग नेक ठहरेंगे।” (रोमि. 5:19; 1 तीमु. 2:6) दूसरे शब्दों में कहें तो एक परिपूर्ण इंसान की गलती की वजह से सभी इंसानों को नुकसान हुआ, तो उसकी भरपाई करने के लिए भी एक परिपूर्ण इंसान को आज्ञा माननी थी। क्या यहोवा मामले को ऐसे ही रफा-दफा नहीं कर सकता था? क्या वह आदम के वफादार बच्चों को यूँ ही हमेशा तक जीने का मौका नहीं दे सकता था? शायद हम अपरिपूर्ण इंसानों को लगे कि अगर यहोवा ऐसा करता तो कितना अच्छा होता। लेकिन ऐसा करना यहोवा के न्याय के स्तरों के खिलाफ होता। यह ऐसा होता मानो यहोवा आदम के पाप को अनदेखा कर रहा है। पर यहोवा ऐसा कभी नहीं कर सकता, क्योंकि वह हमेशा न्याय करता है। प्र25.01 पेज 20-21 पै 3-4
सोमवार, 26 अक्टूबर
हम आँखों-देखी चीज़ों से नहीं बल्कि विश्वास से चलते हैं।—2 कुरिं. 5:7.
प्रेषित पौलुस बहुत जल्द मार डाला जानेवाला था। पर वह खुश था क्योंकि उसने एक अच्छी ज़िंदगी जी। उसने कहा, “मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्वास को थामे रखा है।” (2 तीमु. 4:6-8) पौलुस ने यहोवा की सेवा करने का बढ़िया फैसला लिया था। उसे यकीन था कि उसके इस फैसले से यहोवा बहुत खुश है। हम भी अच्छे फैसले लेना चाहते हैं ताकि यहोवा हमसे खुश हो। पर हम यह कैसे कर सकते हैं? पौलुस ने अपने बारे में और दूसरे वफादार मसीहियों के बारे में कहा, “हम आँखों-देखी चीज़ों से नहीं बल्कि विश्वास से चलते हैं।” बाइबल में कई जगहों पर जब ‘चलने’ की बात की गयी है, तो उसका मतलब है कि एक इंसान कैसी ज़िंदगी जीता है। विश्वास से चलनेवाला इंसान यहोवा पर भरोसा रखता है और कोई भी फैसला लेते वक्त ध्यान देता है कि उस बारे में यहोवा की क्या सोच है। उसे पूरा यकीन होता है कि बाइबल में यहोवा ने जो कहा है उसे मानने से उसे फायदा होगा। यही नहीं, आगे चलकर यहोवा उसे इनाम भी देगा।—भज. 119:66; इब्रा. 11:6. प्र25.03 पेज 20 पै 1-2