मंगलवार, 29 सितंबर
जो मुझे ताकत देता है, उसी से मुझे सब बातों के लिए शक्ति मिलती है।—फिलि. 4:13.
हम दूसरों में अपनी ताकत तो नहीं डाल सकते, लेकिन उनकी मदद करने के लिए हम अपनी ताकत ज़रूर लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, हम बुज़ुर्ग या बीमार भाई-बहनों के लिए खरीदारी कर सकते हैं या उनके घर के काम-काज कर सकते हैं। या फिर हम राज-घर की साफ-सफाई और रख-रखाव में हाथ बँटा सकते हैं। यह भी याद रखिए कि हमारे शब्दों में बहुत ताकत होती है। इसलिए सोचिए, क्या आप किसी ऐसे भाई या बहन को जानते हैं जिसे हौसले की ज़रूरत है? या किसी ऐसे भाई या बहन को जिसे दिलासे की ज़रूरत है? अगर हाँ, तो क्यों ना आगे बढ़कर उनकी हिम्मत बँधाएँ! आप उनसे मिलने जा सकते हैं, फोन कर सकते हैं या उन्हें कार्ड, ईमेल या मैसेज भेज सकते हैं। यह चिंता मत कीजिए कि आप उनसे क्या कहेंगे। आपको कोई बड़ी बात कहने की ज़रूरत नहीं है, बस दिल से उनसे बात कीजिए। हौसला बढ़ाने के लिए इतना ही काफी होता है। और क्या पता आपकी बातों से वह भाई या बहन एक और दिन वफादार रह पाए और अपने हालात के बारे में सही नज़र रख पाए।—नीति. 12:25; इफि. 4:29. प्र24.09 पेज 28 पै 8-10
बुधवार, 30 सितंबर
अगर कोई आदमी निगरानी का काम करने की कोशिश में आगे बढ़ता है, तो वह एक बढ़िया काम करने की चाहत रखता है।—1 तीमु. 3:1.
अगर आप एक सहायक सेवक हैं, तो आप ऐसी कई योग्यताएँ पूरी कर रहे हैं जो एक प्राचीन में होती हैं। आप और क्या कर सकते हैं ताकि आप एक प्राचीन बन सकें? इस “बढ़िया काम” के लिए आप कैसे आगे आ सकते हैं? एक प्राचीन प्रचार काम में अगुवाई करता है, रखवाली भेंट करने और सिखाने में मेहनत करता है। साथ ही, वह अपनी बातों से मंडली को मज़बूत करता है और भाई-बहनों के लिए एक अच्छी मिसाल रखता है। सच में, हमारे प्राचीन बहुत मेहनत करते हैं! इसी वजह से बाइबल में उन्हें “आदमियों के रूप में तोहफे” कहा गया है। (इफि. 4:8) अगर आप एक प्राचीन बनना चाहते हैं, तो आपको क्या करना होगा? प्राचीन बनना एक नौकरी पाने जैसा नहीं है। अगर आपके पास थोड़ा-बहुत हुनर है या आपको कोई काम आता है, तो आपको दुनिया में नौकरी मिल सकती है। लेकिन प्राचीन बनने के लिए बस प्रचार करने और सिखाने का हुनर होना काफी नहीं है। इसके लिए एक भाई को बाइबल में दी योग्यताएँ भी पूरी करनी होती हैं। ये योग्यताएँ 1 तीमुथियुस 3:1-7 और तीतुस 1:5-9 में दी गयी हैं। प्र24.11 पेज 20 पै 1-3
गुरुवार, 1 अक्टूबर
मैं यहोवा की राह देखूँगा।—मीका 7:7.
हमें अकसर यहोवा के संगठन से निर्देश मिलते हैं, जैसे प्राचीनों से, सर्किट निगरान से, शाखा दफतर से या शासी निकाय से। इन निर्देशों को मानने से हम और अच्छी तरह यहोवा की सेवा कर पाते हैं। लेकिन हो सकता है, कभी-कभी हमें समझ ना आए कि हमें जो निर्देश मिला है, उसके पीछे क्या वजह है। या फिर हमें लगे कि उस निर्देश को मानने से नुकसान होगा। यह भी हो सकता है कि जिन भाइयों ने हमें निर्देश दिए हैं, हम उनकी कमियों पर ध्यान देने लगें। जब हम विश्वास से चलते हैं, तो हम भरोसा रखते हैं कि यहोवा ही संगठन को चला रहा है और वह जानता है कि हमारी भलाई किसमें है। इसलिए जब हमें कोई निर्देश मिलता है, तो हम तुरंत उसे मानते हैं और ऐसा खुशी-खुशी करते हैं। (इब्रा. 13:17) हम यह भी याद रखते हैं कि ऐसा करने से मंडली में एकता बनी रहेगी। (इफि. 4:2, 3) यह सच है कि अगुवाई करनेवाले भाई परिपूर्ण नहीं हैं, लेकिन अगर हम उनकी बात मानें, तो हम भरोसा रख सकते हैं कि यहोवा हमें आशीष देगा। (1 शमू. 15:22) और अगर कुछ फेरबदल की ज़रूरत है, तो यहोवा ज़रूर करेगा। प्र25.03 पेज 23-24 पै 13-14